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गौरेला-पेंड्रा -मरवाही: 15वें वित्त की राशि पर डाका: पंचायतों का विकास ठप, अधिकारियों-कर्मचारियों की जेबें गर्म, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल…? ग्राम पंचायतों में फर्जी भुगतान का खेल, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल….?

गौरेला-पेंड्रा -मरवाही: 15 वें वित्त की राशि पर डाका: पंचायतों का विकास ठप, अधिकारियों-कर्मचारियों की जेबें गर्म, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल…?

ग्राम पंचायतों में फर्जी भुगतान का खेल, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल….?

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रायपुर/गौरेला:- जनपद पंचायत गौरेला के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतें इन दिनों गंभीर आरोपों की वजह से सुर्खियों में हैं। पंचायत चुनाव 2025 के उपरांत ग्राम पंचायत पुटा, करगी खुर्द, टीकर खुर्द, आमगांव, गांगपुर, साल्हेघोरी, पंडरीपानी और खोडरी समेत अन्य पंचायतों में 15वें वित्त की राशि का बड़े पैमाने पर फर्जी उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायतों के नाम पर जारी की गई विकास निधि का लाभ गांव तक पहुंचने की बजाय सचिवों, कर्मचारियों और अधिकारियों की जेब तक सीमित होकर रह गया है।

फर्जीवाड़े का तरीका…

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स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस पूरे खेल में डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का दुरुपयोग किया गया। पंचायत बैठक के बिना, प्रस्ताव पारित किए बिना और तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति लिए बिना एक ही फर्म साहू ट्रेडर्स को लाखों रुपए का भुगतान सीधे ट्रांसफर कर दिया गया। सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों तक को इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई। बताया जाता है कि जनपद पंचायत स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से डोंगल और पासवर्ड का इस्तेमाल कर खातों से रकम ट्रांसफर की गई।

खुलासा और लीपापोती

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मामला तब खुला जब कुछ पंचायतों ने मौखिक शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने पर संबंधित फर्म ने कुछ राशि वापस खातों में जमा कर दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस फर्जीवाड़े के बावजूद दोषियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायत भी ठंडी बस्ते में_____

जनपद पंचायत उपाध्यक्ष गायत्री राठौर ने इस पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत 29 जुलाई 2025 को सीईओ जनपद पंचायत गौरेला को दी थी। इसकी प्रतिलिपि कलेक्टर गौरेला और जिला सीईओ को भी भेजी गई थी। मगर शिकायत दर्ज हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और न तो जांच टीम गठित की गई और न ही किसी प्रकार की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। उल्टा, जिन कर्मचारियों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हीं को 15वें वित्त की शाखा का जिम्मा सौंप दिया गया। यह तथ्य पूरे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विकास के नाम पर लूट_____

गौरतलब है कि सरकार 15वें वित्त की राशि पंचायतों के विकास के लिए जारी करती है। इन पैसों का उपयोग गांवों में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर होना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। विकास कार्यों की बजाय सचिवों, फर्जी फर्म संचालकों और जनपद पंचायत के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों का ही ‘विकास’ जमकर हो रहा है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यह सीधे-सीधे जनहित के साथ धोखा और विश्वासघात है। जिला पंचायत के उच्च अधिकारियों को सबूतों के साथ शिकायत दी गई, फिर भी किसी कार्रवाई का न होना अपने आप में बेहद शर्मनाक है।

उपाध्यक्ष का आक्रोश_____

जनपद उपाध्यक्ष गायत्री राठौर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को ही जांच का जिम्मा सौंपकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे सुनियोजित लीपापोती करार दिया है। राठौर का कहना है कि यदि प्रशासन ईमानदारी से जांच कराए तो पूरा भ्रष्टाचार उजागर हो जाएगा और करोड़ों की गड़बड़ी सामने आ सकती है।

प्रभारी मंत्री तक जाएगी शिकायत____

गायत्री राठौर और उनके प्रतिनिधि महेश राठौर ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो वे इस पूरे मामले को जिले के प्रभारी मंत्री के संज्ञान में ले जाएंगे। उनका कहना है कि अब यह मामला केवल पंचायतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर रहा है।

जनता में आक्रोश____

गांव के लोगों में भी इस फर्जीवाड़े को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्य ठप पड़े हैं। न सड़क बनी, न नाली बनी, न ही पेयजल की व्यवस्था सुधरी। हर बार की तरह केवल कागजों पर काम दिखाकर पैसा हजम कर लिया गया।

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